Post navigation help also needs power रात में खिलती है बेला प्रभात में शत दल स्फूटन के लिए नहीं हैजरूरी उजाला अंधेरा जागे जिस क्षण चेतना, वही सवेरा.. जागे जिस क्षण चेतना,वही सवेरा..